समाजवादी पार्टी में मचा घमासान, अखिलेश की छवि सुधारने की कोशिस, नौटंकी, या सत्य?

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समाजवादी पार्टी में मचा घमासान, अखिलेश की  छवि सुधारने की कोशिस, नौटंकी, या सत्य?

उत्तर प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी, सपा में जो आतंरिक घमासान चल रहा है वह बड़ा हीं रोचक और रोमांचकारी है। खबर आती है कि मुख्यमंत्री जी के चाचा श्री शिवपाल सिंह यादव को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया, ठीक उसी समय मुख्यमंत्री अखिलेश यादव उनसे अहम मंत्रालय ले लेते हैं, उनके पसंदीदा मंत्रियों को बर्खास्त कर दिया जाता है, पसंदीदा आला अफसरों को बदल दिया जाता है, तभी खबर आती है कि मुलायम सिंह यादव ने दोनों नेताओं को दिल्ली तलब कर दिया। फिर दोनों हीं यह कहते फिरते हैं कि नेताजी का हर फैसला मान्य होगा। यह किसी फिल्मी ड्रामा से कम नहीं लग रहा है। आपको यह बताना आवश्यक है कि चाचा-भतीजा में यह नूरा-कुश्ती तब से शुरू है जब से शिवपाल यादव ने कुख्यात अपराधी की छवि वाले मुख़्तार अंसारी एवं अफजाल अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल का विलय सपा में करवाने की कवायद शुरू की। अखिलेश यादव को यह नागवार गुजरा और शिवपाल के करीबी मंत्री को बर्खास्त तक कर डाला, यह और बात है कि माननीय नेताजी का हस्तक्षेप हुआ और मंत्री जी की वापसी भी हो गयी। लेकिन सन्देश यह भेजा गया की मुख्यमंत्री अपराधी छवि के लोगों को पार्टी में नहीं लेना चाहते। अब यह देखना है कि सपा में चल रहा पारिवारिक ड्रामा जिसमें वो सारे मसालें हैं जो आज कल की फिल्मों में भी देखने को नहीं मिलते हैं, कब समाप्त होता है तथा विकास की बातें कब से शुरू की जाती हैं।

सटीक विश्लेशण :

सारे खबरों की जब हमारे विशेषज्ञों ने पड़ताल की तो यह पाया कि अगर मुख्यमंत्री जी को अपराधियों और भ्रष्टाचार से असहजता है तो बजाय की इतना शोर मचाया जाए, उन्हें खुद अपना इस्तीफा दे देना चाहिए। हमारी सलाह है कि घरेलू फ़िल्मी ड्रामा छोड़के उत्तर प्रदेश की जनता पर ध्यान दीजिए मुख्यमंत्री जी, हाहाकार मचा हुआ है।

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