नरेंद्र मोदी के “जय श्री राम” नारे पर मची हाय-तौबे का सच

modi at jai sri ram speech

नरेंद्र मोदी के “जय श्री राम” नारे पर मची हाय-तौबे का सच




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नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने लखनऊ में विजय-दशमी के दिन, जब मंच से “जय श्री राम” का नारा लगाया उसी वक़्त देश में सियासी घमासान मच गया कि मोदी जी ने ये क्या कर दिया! कांग्रेस, जद(यू), सपा, बसपा आदि सभी पार्टियों ने एक सुर में विरोध किया तथा इसे चुनावी स्टंट एवं साम्प्रदायिकता को बढ़ावा देने वाला एक कदम करार दिया। नाम नहीं छापने की शर्त पर कांग्रेस के एक बड़े नेता ने यह खुलासा किया कि वास्तव में सभी पार्टियों को हिन्दू मतों के एक-जुट होने का डर सताने लगा है। 2014 में हिन्दू मतों के ध्रुवीकरण का नतीजा सबको दिख चुका है, इसलिए सभी पार्टियाँ उत्तर-प्रदेश चुनाव में हिन्दू मतदाताओं के भाजपा के पक्ष में गोलबंद होने से रोकने के लिए हर संभव कदम उठा रही हैं।



सटीक विश्लेशण :

राजनीति का आधार “धार्मिक सिंबल” नहीं होना चाहिए। एक हिन्दू अपने धर्म को गर्व से धारण करके चले, एक मुस्लिम अपने धर्म को। लेकिन अगर प्रधानमंत्री हिन्दू हैं, मंच हिंदुओं के पूज्य श्री राम की लीला के लिए तैयार है और हमारे यहाँ की तहजीब में आज भी जब लोग एक-दूसरे का हाल पूछते हैं तो कहते हैं, राम-राम! अब महज इस बात के लिए इसे सांप्रदायिक नाम देना किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं है।

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